हमारा नजरिया

प्रगति की राह पर ................

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Archana chaturvedi


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लैपटॉप या लॉलीपॉप ….

Posted On: 6 Mar, 2013  
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वक्त हैं संहार का

Posted On: 15 Jan, 2013  
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लत अख़बार की

Posted On: 29 Nov, 2012  
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पहचान

Posted On: 6 Oct, 2012  
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क्या करू ?

Posted On: 10 Jun, 2012  
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मेरी डायरी की शायरी

Posted On: 18 May, 2012  
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माँ का ख़त -मदर्स डे पर विशेष

Posted On: 12 May, 2012  
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माँ का ख़त

Posted On: 12 May, 2012  
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डरता है ये खत मेरा …..

Posted On: 26 Apr, 2012  
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के द्वारा: jai... jai...

के द्वारा: Archana chaturvedi Archana chaturvedi

के द्वारा: mparveen mparveen

के द्वारा: Archana chaturvedi Archana chaturvedi

अर्चना जी नमस्कार,   मात्र 11 वर्ष ही उम्र में इतने उच्च स्तरीय भाव निःसंदेह वंदनीय हैं। मेरा मानना है कविता बुद्धि से नहीं हृदय से लिखी जाती है। कविता मे तुक नहीं लय एवं गति की आवश्यकता होती है। यह आपकी कविता में विद्यमान है।    आज आपको एक राज की बात बता ही देता हूँ। ईश्वर और कोई नहीं माँ ही है। सच कहूँ मैंने ईश्वर को मंदिर, मस्जिद, चर्च, गुरुद्वारे सभी जगह खोजा। वहाँ कहीं नजर नहीं आया। जब माँ को गौर से देखा तो ईश्वर के सारे गुण माँ में नजर आये। धर्म का व्यापार करने वाले ठेकेदार मेरी बातों से सहमत नहीं होंगे। किन्तु यह प्रमाणिक एवं तार्किक सत्य है। कृपया इसे भी पढ़े- नेता- कुत्ता और वेश्या (भाग-2) http://dineshaastik.jagranjunction.com/

के द्वारा: dineshaastik dineshaastik

अर्चना जी, नमस्कार माँ की ममता का क्या कहना उसके आगे तो सब जंहा की दौलत भी कम है, बस कद्र होनी चाहिए सुन्दर विषय पर सुन्दर कविता आपकी वैसे मैं विश्लेषक नहीं हूँ, ना ही मुझे भाषा का उतना ज्यादा ज्ञान है किन्तु एक बात कहना चाहूँगा यदि आप बुरा ना माने आपकी कविता का विषय तो काफी बंधिया है, आपने मेहनत भी खूब की है पर फिर भी कविता बिखरी - बिखरी सी लग रही है यदि आप इससे पुनः सुनियोजित कर के लिखे तो बेहतर होगा वैसे इन मुद्दों की कविताओं पर यदि आदरणीय "भ्रमर" जी कुछ बता दें तो समझिएगा की कुछ सिखने को मिल गया ................................उम्मीद है आप मेरी बात को अन्यथा नहीं लेंगी .....................बस लिखते रहिये धन्यवाद

के द्वारा: ANAND PRAVIN ANAND PRAVIN




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